Tuesday, January 12, 2010

साजि चतुरंग बीररंगमें तुरंग चढी ,
सरजा सिवाजी जंग जीतन चलत है |
भूषन भनत नाद बिहद नगारन के ,
नदी नद मद गैबरनके रलत है ||



भूपन भनत भाग्यो कासीपति विश्वनाथ ,
और कौन गिनतीमें भूली गति भब की |
चारों वर्ण धर्म छोडि कलमा निवाज पढ़ी ,
सिवाजी न होतो तो सुनति होत सब की ||

1 comment:

  1. do u have full Chhand ?

    if yes plz do send me girishp_1967@yahoo.co.in

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